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  Title :
पृथ्वीराज नगर विस्तार की नई योजना का एलान जल्द
  Description :  
 
एसीबी के मुकदमें में फंसे थे यूआईटी
हालांकि कांग्रेस शासनकाल में यह योजना एनआरआई कॉलोनी के नाम से शुरू करने का एलान हुआ था, लेकिन योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले ही तत्कालीन यूआईटी सदर एंटी करप्शन ब्यूरो के मुकदमे में फंस कर पद गंवा बैठे। अब इसी योजना को नए रूप में तैयार कर लाया जा रहा है। तकरीबन 130 बीघा क्षेत्र में बनने वाली इस योजना के लिए सर्वे का काम शुरू हो गया है। इस योजना में संपूर्ण भूमि राजकीय है, इसलिए खातेदारों को मुआवजा या जमीन के बदले जमीन देने का झंझट भी नहीं है। यह जरूर है कि इस योजना में भी पंचशील ई ब्लॉक की तरह ही करीब 11 बीघा जमीन चरागाह की है। हालांकि यह स्पष्ट हो चुका है कि अजमेर विकास प्राधिकरण एक्ट के तहत एडीए को हस्तांतरित हो चुकी जमीन की किस्म को लेकर कोई विवाद नहीं होगा और वह एडीए की ही मानी जाएगी।
कंसल्टेंट फर्म से सर्वे
एडीए ने प्रस्तावित योजना का सर्वे एक कंसल्टेंट फर्म को सौंपा है। इस फर्म ने काम शुरू कर दिया है। नवकार कंसल्टेंट द्वारा जमीन के राजस्व नक्शे के साथ ही प्रस्तावित प्लॉटों और सड़कों सहित योजना क्षेत्र में आरक्षित रखे जाने वाले सुविधा क्षेत्र का सर्वे कर रिपोर्ट दी जाएगी। हालांकि कांग्रेस शासनकाल में एनआरआई योजना के नाम से योजना बनाई गई, तब एक फर्म ने सर्वे किया था। लेकिन उस फर्म का सर्वे मापदंडों के अनुरूप सही नहीं पाया गया। इसलिए नए सिरे से सर्वे करवाया जा रहा है।15 जुलाई को एडीए की बोर्ड बैठक प्रस्तावित है। इसमें अन्य मुद्दों के साथ ही पृथ्वीराज नगर विस्तार योजना का प्रस्ताव भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि एडीए प्रशासन ने अब तक बोर्ड बैठक के एजेंडे का खुलासा नहीं किया है।
योजना से होगी करोड़ों की आय
एडीए को इस योजना के लांच होने के साथ ही आवेदन मांगते ही करीब तीन से चार करोड़ और लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद करीब 30 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है।
शाहनी ने बनाई थी योजना
तत्कालीन यूआईटी के सदर नरेन भगत शाहनी ने पृथ्वीराज नगर के पास एनआरआई कॉलोनी के नाम से योजना बनाई थी। इस योजना में प्लाटों के साइज के साथ ही चौड़ी सड़कें प्रस्तावित की गई थी। विदेशों में बसे भारतीयों को अजमेर में अलग कॉलोनी के लिए यह योजना बनाई गई थी, लेकिन योजना को अमलीजामा पहनाया जाता उससे पहले ही शाहनी को एंटी करप्शन ब्यूरो में दर्ज हुए मुकदमे की वजह से पद गंवाना पड़ गया।
     
     

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